नहीं रहे


जो हम पहेले हुवा करते थे अब वो हम नहीं रहे
जो तुम पहेले हुवा करते थे अब वो तुम नहीं रहे

जो ज़ख्मों को राहत देते थे अब वो मरहम नहीं रहे
जो आँखो को नम कर जाते थे अब वो गम नहीं रहे

जो बहारों में खिलखिलाते थे अब वो गुलशन नहीं रहे
जो वक़्त पर बदल जाते थे अब वो मौसम नहीं रहे

जो कभी न डगमगाते थे अब वो कदम नहीं रहे
जो दागों से संवर जाते थे अब वो दामन नहीं रहे

जो सूरज पर नाज़ करते थे अब वो नीले गगन नहीं रहे
जो अमावस में टिमटिमाते थे अब वो सितारे रोशन नहीं रहे

जो बिना कहे साथ निभाते थे अब वो हमदम नहीं रहे
जो तुफानो में भी लहराते थे अब वो परचम नहीं रहे

जो हम पहेले हुवा करते थे अब वो हम नहीं रहे
जो तुम पहेले हुवा करते थे अब वो तुम नहीं रहे

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बयाँ कर गई


बहुत सारी बाते कहनी थी मगर
वो बात ज़बा पे आते आते रह गई|
जो हम कहना चाहते थे उनसे
वो हमारी ख़ामोशी बयाँ कर गई ||

बहुत बुराई देखी हमने मगर
वो हम मे आते आते रह गई |
जो अच्छाई दिखाना चाहते थे
वो हमारी सूरत बयाँ कर गई||

बहुत सारी ऐसी तस्वीरे थी
वो नज़र मे आते आते रह गई|
जो हम दिखाना चाहते थे
वो हमारी नज़रे बयाँ कर गई||

बहुत सारी हमारी कहानियाँ थी
वो पन्नों पे आते आते रह गई |
जो कहानी हम लिखना चाहते थे
वो हमारी हालत बयाँ कर गई||

बहुत सारी बाते कहनी थी मगर
वो बात ज़बा पे आते आते रह गई|
जो हम कहना चाहते थे उनसे
वो हमारी ख़ामोशी बयाँ कर गई ||

रंग भरना है


होली सिर्फ रंगो का त्योहार ही नहीं बलके उसके साथ हिरण्यकश्यप के असुरत्व पर प्रहाद की प्रभुभक्ति की विजय का, राग द्वेष भूल सब से इंद्रधनुष के रंगो की तरह मिलने का, बेरंग से जीवन मे प्यार, दोस्ती,उत्साह और उमंग के रंग भरने का त्योहार है
होली के रंगोत्सव में सब को इंद्रधनुष के रंगो से खुद के और दुसरो के जीवन में रंग भरना है परन्तु वास्तव मे हमें बनावटी रंगो के अलावा बहोत सारे रंगो को जीवन मे भरने कि आवश्यकता है जो मैं अपनी कुछ काव्य पंक्तियो से व्यक्त करने का प्रयत्न करते हुए आशा करता हु सब को इन रंगो में रंगना सब को अछा लगेगा

मुझे जीवन में कुछ ऐसा रंग भरना है
सारी कठोरता त्याग कर मुझे सवेंदना का रंग भरना है
सारी विवशता त्याग कर मुझे सक्षमता का रंग भरना है
सारी संकुचितता त्याग कर मुझे उदारता का रंग भरना है
सारी कडवाश त्याग कर मुझे मिठाश का रंग भरना है
मुझे जीवन में कुछ ऐसा रंग भरना है
सारा भ्रम त्याग कर मुझे वास्तविकता का रंग भरना है
सारा हीनभाव त्याग कर मुझे समानता का रंग भरना है
सारा जड़त्व त्याग कर मुझे चेतना का रंग भरना है
सारा असुरत्व त्याग कर मुझे दैवत्व का रंग भरना है
मुझे जीवन में कुछ ऐसा रंग भरना है

होली के शुभअवसर पर सभी मित्रो को हार्दिक शुभ कामनाए और सब का जीवन जीवन इंद्रधनुष के रंगो के साथ खुशियो के रंगो भरा रहे…….!!!!! Wishing you all Happy and Safe Holi in Advance…..!!!!

सर्द सुबह


 सर्द सुबह की बात ही कुछ अलग हैइसमें प्रकृति की रंगीन झलक है

वो सुरज की किरणो का धरती पर आने मे आलसीपन,
ग्रीष्म को अलविदा कहेती शीतल हवाओ का आगमन,
वो लकड़ीया जलाके हाथ सेकते ठंड को भगाने का आनंद,
धरती पर ही बादलों की सैर कराता हर तरफ घना धुंध,
सर्द सुबह की बात ही कुछ अलग है इसमें प्रकृति की रंगीन झलक है

वो ठिठुरते हाँथो में गरमागरम चाय की चुस्कियाँ ,
अपने धोंसले से निकलते पंछियो की मस्तियाँ ,
वो ठंड से सिकुड़ते बच्चों कि उठने की आनाकानी,
बड़ो की दांत तड़तड़ाती ठंडी मे नहाने की परेशानी ,
सर्द सुबह की बात ही कुछ अलग है इसमें प्रकृति की रंगीन झलक है

वो उद्यानों में कसरत करने के लिए उमड़ते लोग
वही गरम चाय के साथ दोस्तों से गप्पे लड़ाते लोग
वो स्वास्थ्य वर्धक काळो से भरपुर रंगबिरंगी ठेला
जैसे लगा हो शिशिर के आगमन का भव्य मेला
सर्द सुबह की बात ही कुछ अलग है इसमें प्रकृति की रंगीन झलक है

स्वतंत्रता दिवस


फिर से एक और स्वतंत्रता दिवस आया है
क्षणिक देश भक्ति की लहेर साथ लाया है
हर जगह तिरंगा लहराता नजर आयेगा
हर भारतीय गर्व से “जन गन मन” गायेगा
लोगो को आज ही शहीदों की याद आएगी
आज़ादी मुबारक के संदेशो की लड़ी लग जाएगी
टीवी पे देश भक्ति की फिल्मो की भरमार होगी
बड़ी दुकानों (मॉल ) में सस्ता सामान पाने कतार होगी
नेताओ के देश भक्ति वाले भाषणों का दौर चलेगा
समाचारों में आज़ादी के बाद की उपलबधियो का शोर मचेगा
आशा करता हु हम भ्रष्टाचार से जल्द आज़ादी पाएंगे
अपनी आज़ादी का पर्व दुगनी ख़ुशी और गर्व से मनायेगे
फिर से एक और स्वतंत्रता दिवस आया है
क्षणिक देश भक्ति की लहेर साथ लाया है

मजधार


 

सही को गलत तरीके से करू या गलत को सही तरीके से |
सही गलत की इस उठापटक मे न में सही रहा न गलत रहा ||

अपनों को पराया बनाऊ या परायो को अपना बनाऊ |
रिश्तो की इस सांठगाठ मे न में अपनों का रहा न परायो का ||

कुछ पाने के लिए सब कुछ खो दू या कुछ खो कर सब कुछ पा लु|
कुछ खोने कुछ पाने के इस हिसाब किताब मे सब खोया ही खोया ||

कुछ दिखाने के लिए आँखें खोलु या बंद आँखों से ही सब देख लु|
आँखों की इस आँखमिचोली मे न कुछ देख सका न दिखा सका ||

भगवान को इन्सान समज लू या इन्सान को भगवान समज लु|
इस घमासान मे न में भगवान को समज पाया ना इन्सान को ||

बुरा बन गया


जब तक सब का कहा करता रहा तब तक अच्छा था।
जब से अपने मन की करने लगा तब से बुरा बन गया॥

जब तक सब के लिए मरता रहा  तब तक अच्छा था।
जब से अपने लिए जीने लगा तब से बुरा बन गया॥

जब तक सब के साथ रहा तब तक अच्छा था।
जब से अकेला  चलने लगा तब से बुरा बन गया॥

जब तक सबको जवाब देता रहा तब तक अच्छा था।
जब से सवाल करने लगा तब से बुरा बन गया॥

जब तक सबकी  बुराईया अनदेखी की तब तक अच्छा था।
जब से अपनी अच्छाई  दिखाने  लगा तब से बुरा बन गया॥

जब तक सब की बात समझता रहा तब तक अच्छा था।
जब से अपनी बात समझाने लगा तब से बुरा बन गया॥

जब तक चहेरे आइनों में देखता रहा तब तक अच्छा था।
जब से सब को आइना दिखाने लगा तब से बुरा बन गया॥

मैं तो चलता चला


 जिंदगी की धुप छाव से बेफिकर ज़िंदगी के सफ़र मे मैं तो चलता चला
जो भी  मिला राह मे उसे  हमसफ़र बना कर  मैं तो चलता चला

 

ख़ुशी मिले या गम मिले, मैं तो हमेशा मुस्कुराता चला
कभी न कभी कोई तो सुनेगा, इस उमीद से पुकारता चला
अपना  या पराया सोचे बिना, सब का साथ निभाता चला
लोगो की परवाह किये बिना, मैं तो अपनी धुन में गाता चला
                                                        मैं तो चलता चला ….
प्यार मिले या नफरत मिले, मैं तो प्यार बांटता चला
कुछ पाने की चाह बिना, मैं तो अपना सब लुटाता चला
किसी का न हो सका, फिर भी सब को अपना बनाता चला
जल्द  सुबह होगी यही उमीद मे, अपना दिया जलाता चला
                                                    मैं तो चलता चला ….
राह में रुकता थकता गिरता, और गिर कर संभलता चला
आगे बड़ने से रोकने वाले, हर पत्थर को रोंदता चला
मंजिल तो तय  न थी पर, रास्तो पर निशा छोड़ता चला
खुले असमान में उड़ने के लिए, सारी बंदिशों को तोड़ता चला
                                                              मैं तो चलता चला ….

 

  जिंदगी की धुप छाव से बेफिकर ज़िंदगी के सफ़र मे मैं तो चलता चला
 जो भी  मिला राह मे उसे  हमसफ़र बना कर  मैं तो चलता चला

कम पड़ गए


सज्जनता  की परख तो भालीभाती थी पर दुष्टता  को परख ने के लिए तर्क कम पड़ गए।
दुर्जनों के  संग का रंग ऐसा लगा की हममे और उनमे फर्क कम पड़ गए।।
कुछ प्राप्त करने  का निश्चय तो  दृढ़  था  पर उसके लिए प्रयत्न कम पड़  गए।
जो था उसे  गवाना नहीं चाहते थे पर उसे संभाल ने लिए यत्न कम पड़  गए।।
लक्ष्य तो आँखों के सामने था पर आगे बड़ने के लिए कदम  सुन्न पड़ गए।
तपन सहन करने को तो सज्ज थे पर सूर्य के किरण मद्धम  पड़ गए।।
युध्ध में विजय के निकट थे पर शत्रु को मारने के लिए शस्त्र कम  पड़ गए।
धायल होना तो निश्चित था पर धावो से  बहता लहू रोकने के लिए वस्त्र कम पड़ गए।।
भाग्य में तो दीर्धायु लिखी थी पर  जीवन के लिए कुछ क्षण कम पड़ गए।
मृत्यु का भय नहीं था पर उसे हसके स्वीकारने ने के लिए कारण  कम पड़ गए।।

મારે રંગે રંગાવું છે


હોળી ને  હવે આંગળી ના વેઢે ગણી શકાય એટલા જ દિવસો રહ્યા છે. હોળી એટલે ખાલી રંગો નો ઉત્સવ ના રહી સાથો સાથ હિરણ્ય કશ્યપ ની આસુરીવૃત્તિ પર પ્રહલાદ ની પ્રભુભક્તિ ના વિજય નો પણ ઉત્સવ છે. હોળી ના રંગોત્સવ માં દરેક ને ઇન્દ્રધનુષ ના રંગો થી રંગાવું છે પણ અપને ખરે ખર બીજા ઘણા રંગો થી રંગાવાની પણ જરૂર છે જે સમગ્ર વાત મેં એક કાવ્ય દ્વારા વ્યક્ત કરવાનો પ્રયત્ન કર્યો છે આશા રાખું છું તમને પસંદ પડશે.
મારે રંગે રંગાવું છે
સધળી જડતા ત્યજી મારે ચેતના ના રંગે રંગાવું છે
સધળી કઠોરતા ત્યજી મારે સંવેદના ના રંગે રંગાવું છે
સધળી સંકુચિતતા ત્યજી મારે ઉદારતા ના રંગે રંગાવું છે
સધળી ચંચળતા ત્યજી મારે એકાગ્રતા ના રંગે રંગાવું છે
સધળી કડવાશ ત્યજી મારે મીઠાશ ના રંગે રંગાવું છે
સધળી દ્રવ્યતા ત્યજી મારે હળવાશ ના રંગે રંગાવું  છે
સધળી વિવશતા ત્યજી મારે સક્ષમતા ના રંગે રંગાવું છે
સધળી મૂર્ખતા ત્યજી મારે બુદ્ધિમતા ના રંગે રંગાવું છે
સધળી નકારાત્મકતા ત્યજી મારે હકારાત્મકતા ના રંગે રંગાવું છે
સધળી ભ્રામકતા ત્યજી મારે વાસ્તવિકતા ના રંગે રંગાવું છે
સધળી અમાનવીયતા ત્યજી મારે માનવતા ના રંગે રંગાવું છે
સધળી આસુરીવૃત્તિ ત્યજી મારે દૈવીવૃતિ ના રંગે રંગાવું છે
મારે રંગે રંગાવું છે